{"product_id":"amritkal-mein-loktantra","title":"Amritkal Mein Loktantra","description":"\u003cp\u003e'अमृत' शब्द अमरता का वादा करता है, 'काल' मृत्यु की चेतावनी। सत्ता ने आजादी के जिस दौर को 'अमृतकाल' नाम दिया, कैवल भारती उसी दौर को लोकतंत्र की कसौटी पर परखते हैं-और सवाल छोड़ जाते हैं कि यह नाम अमरता का उत्सव है, या किसी अंत की उलटी गिनती।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eबीस तीखे निबंधों में वे उन सवालों को छूते हैं, जिन्हें अक्सर टाला जाता है-क्या छुआछूत मुगलों से आई? जातियाँ किसने बनाईं? उत्तर प्रदेश में रामराज्य असल में किसका राज है? कांवड़ यात्रा एक आस्था है या राजनीतिक हथियार ? धर्मांतरण को देश के लिए ख़तरा बताने वालों का असली डर क्या है? जिस हिंदुत्व का एजेंडा ही रामराज्य है, वह सहिष्णु कैसे हो सकता है? धारा ३७० पर सुप्रीम फैसले से लेकर नायक-पूजा के उस उन्माद तक, जिसमें साधो भी बौरा जाए-हर निबंध सत्ता की भाषा को उसके असली अर्थ में खोलकर रखता है। 'तुम्हीं गवाह, तुम्हीं कातिल और तुम्हीं मुंसिफ' जैसे शीर्षक बताते हैं कि भारती किसी पक्ष की भाषा नहीं बोलते-वे सत्ता की अदालत में सत्ता को ही कठघरे में खड़ा करते हैं। आजादी के ७५ साल में दलित साहित्य और दलित-मुक्ति की जगह पर भी वे उतनी ही बेबाकी से लिखते हैं, जितनी बेबाकी से प्रतिरोध के स्वरों और दलित विमर्श पर। और अंत में वह सवाल, जो किताब की रीढ़ है-भारत में लोकतंत्र बार-बार असफल क्यों होता दिखता है, और क्या यह उसकी विदाई का समय है?\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eयह कैवल भारती की पत्रकारिता की अंतिम किताब है। इससे पहले 'लोकतंत्र में भागीदारी के सवाल, 'आंबेडकर को नकारे जाने की साजिश, 'कांशीराम के दो चेहरे' और 'माझी जनता' जैसी किताबों में सत्ता से सवाल पूछते रहे भारती, यहाँ तीन दशकों के अवलोकन, असहमति और अडिग तर्क का सार पाठक के सामने रखते हैं। उनकी भाषा किसी नारे की नहीं, दस्तावेज की है-ठंडी, सटीक और इसीलिए ज्यादा बेधक।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eफासीवाद इतनी आसानी से नहीं जाता, भारती लिखते हैं। यह किताब उसी चेतावनी के साथ पाठक को छोड़ती है- तैयार रहने की, और सवाल पूछते रहने की।\u003c\/p\u003e","brand":"Kanwal Bharti","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66718960320627,"sku":null,"price":349.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0024\/0916\/9011\/files\/Screenshot2026-09-26at15.08.27.png?v=1790416331","url":"https:\/\/kautilya.in\/products\/amritkal-mein-loktantra","provider":"Kautilya Books","version":"1.0","type":"link"}