{"product_id":"dalit-sahitya-vichar-aur-mulyankan","title":"Dalit Sahitya Vichar Aur Mulyankan","description":"\u003cp\u003e\"शायद में लेखक बनने के लिए ही संसार में आया था इसी स्वीकारोक्ति से शुरू होकर, दलित अस्मिता के सबसे बुनियादी प्रश्न तक जाती है यह किताब क्या अछूत पहचान दलितों ने खुद बनाई थी, या किसी और ने उनके लिए तय की-उनकी बस्तियाँ, उनके घर, उनका खाना-पहनना, उनका क्या करना और क्या न करना?\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eकंवल भारती यहाँ केवल आलोचक नहीं, गवाह की तरह लिखते हैं। दलित साहित्य की सैद्धांतिकी से लेकर डॉ. तेज सिंह की उस आंबेडकरवादी अवधारणा तक, जो मार्क्सवादी साहित्य की तर्ज पर खड़ी होना चाहती थी, पर टिक नहीं सकी-हर निबंध एक बहस खोलता है, बंद नहीं करता। और फिर आते हैं वे कृतियाँ, जिन्होंने हिन्दी दलित साहित्य को गढ़ा 'सिपाही की तबाही', 'सन्त माया बलिदान', 'एकलव्य', 'मै भंगी हूँ', जूठन', 'मुक्तिपर्व', 'शवयात्रा', 'उधर के लोग', 'मेरा बचपन मेरे कंधे पर-काव्य, आत्मकथा, नाटक और कथा-साहित्य की तीन दशकों की यात्रा, ओमप्रकाश वाल्मीकि के इतिहास-बोध, मलखान सिंह की कविता के विकास और रजनी तिलक की सौन्दर्य चेतना से गुजरते हुए। रावण को इतिहास या मिथक के रूप में परखने वाला निबंध, बहुजन समाज व आदिबासी समुदाय के अंतर्संबंधों पर चर्चा 'आज़ादी पर उठते सवाल नाली पर मोची' जैसा तीखा शीर्षक, और हिन्दी दलित कथा-साहित्य के तीन दशकों का सिंहावलोकन इसे और विस्तार देते हैं। भारती स्वयं स्वीकार करते हैं कि उपन्यास पढ़ने में उनकी रुचि कम रही है-और यही ईमानदारी इस किताब को एक सुविधाजनक, संपूर्ण होने के दावे से बचाती है और अधिक विश्वसनीय बनाती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eसाहित्य और लोक के विमर्शकार चौथीराम यादव की स्मृति को समर्पित यह किताब दलित विमर्श को समझने के लिए एक ज़रूरी सन्दर्भ-ग्रंथ है-साहित्य, विचारधारा और अस्मिता के प्रतिच्छेदन पर लिखी एक निर्णायक आलोचना पुस्तक, जो पढ़ाई और बहस दोनों की माँग करती है। यह उन पाठकों के लिए है, जो दलित साहित्य को केवल पढ़ना नहीं, समझना और उससे असहमत होना भी चाहते हैं।\u003c\/p\u003e","brand":"Kanwal Bharti","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66718960779379,"sku":null,"price":0.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0024\/0916\/9011\/files\/Screenshot2026-09-26at15.01.40.png?v=1790416463","url":"https:\/\/kautilya.in\/products\/dalit-sahitya-vichar-aur-mulyankan","provider":"Kautilya Books","version":"1.0","type":"link"}