{"product_id":"kanch-ke-panne-aur-anya-kavitayen","title":"Kanch Ke Panne aur anya kavitayen","description":"\u003cp\u003e\"मैंने काँच के पन्ने बना लिए हैं और लिख रही हूँ अब पक्के रंगों से।\"\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eयह पंक्ति एक पूरे संग्रह का इरादा है। डॉ. ऋतु वार्ष्णेय गुप्ता की 'काँच के पन्ने और अन्य कविताएँ' उन स्त्रियों की आवाज़ है जिन्हें बरसों तक पायदान की तरह बिछाया गया, पर जो हार मानने की जगह पन्ने गढ़ने लगीं। इन कविताओं में स्त्री हारती नहीं, बेचैनी में पड़े शब्दों को जोड़कर एक नया इतिहास रचती है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eसाठ से अधिक कविताओं में रोज़मर्रा की ज़िंदगी अपने पूरे सच के साथ उतरती है। वह माँ, जो कंधे पर शिशु बाँधकर ईंटें उठा लेती है और दर्द में भी मुस्कुरा देती है। वह स्त्री, जिसे हादसे के बाद सामान्य जीते देखकर लोग घूरते हैं, और जो उन सवालिया आँखों से नहीं डरती। वह बिखरा हुआ कमरा, जो शादी के बाद करीने की सूची में बदल गया। नेत्र चिकित्सालय में अकेले बैठा वह बुज़ुर्ग, जो इंतज़ार कर रहा है कि कोई अपना आकर कह दे कि ज़िंदगी की बहती सतह पर मरहम अभी बाकी है। स्टोर-रूम के पुराने सामान में गिने जाते माँ-बाप। कोविड की ख़ामोशी, गाँव का छूटा हुआ बचपन, और काशी की गलियों में बसा अपनापन।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eये कविताएँ सजी-धजी नहीं हैं। ये सरल हैं, सीधी हैं और इसी वजह से चुभती भी हैं और सहलाती भी हैं। कवयित्री के शब्दों में, हर कविता किसी न किसी सच्चाई और पीड़ा से जुड़ी है, और हर कविता का अपना एक प्लेटफ़ॉर्म है: बेटी, माँ, पिता, घर की सहयोगी।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eयह संग्रह उन पाठकों के लिए है जो स्त्री-जीवन को संवेदना के साथ पढ़ना चाहते हैं, जो अपनी माँ, बेटी या बुज़ुर्ग माता-पिता को इन पंक्तियों में पहचानेंगे, और जो मानते हैं कि एक छोटी-सी कविता भी बरसों की चुप्पी तोड़ सकती है। यह एक ऐसा उपहार भी है जिसे आप किसी ऐसी स्त्री को दे सकते हैं जिसने बहुत कुछ कहे बिना सहा है।\u003c\/p\u003e\n\u003cp\u003eअपनी प्रति आज ही ऑर्डर कीजिए, और काँच के इन पन्नों में अपना प्रतिबिंब ढूँढिए।\u003c\/p\u003e","brand":"Dr. Ritu Varshney Gupta","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":66808562483315,"sku":null,"price":260.0,"currency_code":"INR","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0024\/0916\/9011\/files\/Screenshot2026-10-07at13.28.57.png?v=1791363242","url":"https:\/\/kautilya.in\/products\/kanch-ke-panne-aur-anya-kavitayen","provider":"Kautilya Books","version":"1.0","type":"link"}