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Gora

Gora

Ravindranath Tagore

Rs. 399.00

'गोरा' रवीन्द्रनाथ टैगोर का केवल एक उपन्यास नहीं है-यह भारतीय समाज, पहचान, धर्म, और व्यक्ति के भीतर चलने वाले वैचारिक द्वंद्व का अद्भुत साहित्यिक रूपांतरण है। यह उपन्यास बंगाल नवजागरण, ब्रह्म समाज, पारंपरिक हिंदू सोच और अंग्रेज़ी उपनिवेशवाद के टकराव की पृष्ठभूमि में लिखा गया था, पर इसकी चेतना पूरे भारतीय उपमहाद्वीप के लिए समान रूप से सार्थक है। टैगोर ने इस रचना के माध्यम से दिखाया कि धर्म और राष्ट्रवाद से भी ऊपर मानवता और आत्मा की स्वतंत्रता होती है। 'गोरा' नामक पात्र इस उपन्यास का केन्द्रीय स्तम्भ है-एक ऐसा युवा जो अपनी हिंदू पहचान पर गर्व करता है, राष्ट्रभक्ति में डूबा हुआ है और भारत की स्वतंत्रता को धर्म के पुनर्जागरण से जोड़कर देखता है। लेकिन जब उसे यह ज्ञात होता है कि वह वास्तव में हिंदू नहीं है, तब उसके विश्वास की नींव हिल जाती है। यहीं से उपन्यास उस गहरे प्रश्न को उठाता है: क्या हमारी पहचान जन्म और जाति से तय होती है या विचार, संवेदना और कर्तव्य से? रवीन्द्रनाथ टैगोर ने 'गोरा' के माध्यम से यह दर्शाया कि एक व्यक्ति की विचारधारा अगर पूर्वग्रहों पर टिकी हो, तो वह आत्म-ज्ञान की यात्रा में बाधा बनती है। गोरा का परिवर्तन-एक कट्टरपंथी से एक सहिष्णु, समावेशी और मानवीय दृष्टिकोण रखने वाले व्यक्ति में-उपन्यास का सबसे शक्तिशाली पहलू है। यह परिवर्तन केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस कालखंड के पूरे समाज का रूपांतरण है। टैगोर हमें बताते हैं कि भारत की सच्ची आत्मा किसी एक संप्रदाय में सीमित नहीं हो सकती; वह तो सबको समाहित करने वाली चेतना है। उपन्यास की महिला पात्र-सुचरिता, ललिता, और अनंदमयी-टैगोर की प्रगतिशील सोच को दर्शाती हैं। ये महिलाएं केवल प्रेम की प्रतीक्षा करने वाली पारंपरिक नायिकाएं नहीं हैं, बल्कि वैचारिक स्वतंत्रता, सामाजिक चेतना और आत्मसम्मान की प्रतीक बनकर सामने आती हैं। टैगोर के लिए नारी कोई दया की पात्र नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन की सक्रिय सहभागी है। 'गोरा' की भाषा गम्भीर, साहित्यिक और दर्शनीय है-हर संवाद के पीछे एक दर्शन है, और हर स्थिति के पीछे एक गहरा सामाजिक संकेत। टैगोर का लेखन न केवल भावनाओं को छूता है, बल्कि मन और मस्तिष्क को भी सक्रिय करता है। उनका यह उपन्यास भारत की आत्मा, उसकी बहुलता, विविधता और उसके भीतर छुपी एकता को उकेरने का अद्वितीय प्रयास है।

Details
  • HIN- Hindi
  • Paperback
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